✨ छोड़ दीजिए ✨
नाराज़ क्यों होना किसी से,
हर बात दिल लगाना छोड़ दीजिए।
जो समझे न ख़ामोशी आपकी,
उसे बार-बार समझाना छोड़ दीजिए।
काम से काम रखिए अपना,
हर रिश्ते को निभाना छोड़ दीजिए।
जो रूठकर भी मुड़कर न देखे,
उसे हर बार मनाना छोड़ दीजिए।
माफ़ कर दीजिए दिल से सबको,
मगर एहसान गिनाना छोड़ दीजिए।
जो अपना होकर अपना न समझे,
उसे अपना बताना छोड़ दीजिए।
बेचैन करे उसकी ख़ामोशी तो भी,
बार-बार आवाज़ लगाना छोड़ दीजिए।
जिसे फ़िक्र होगी आपकी सच में,
उसे अपनी याद दिलाना छोड़ दीजिए।
परवाह रहे तो दिल में रखिए,
हर बार उसे जताना छोड़ दीजिए।
जहाँ क़दर न हो जज़्बातों की,
वहाँ दिल को दुखाना छोड़ दीजिए।
कैसे भी बसर करे कोई अपना,
उस पर अपना हक़ जताना छोड़ दीजिए।
कुछ रिश्ते दूर से अच्छे लगते हैं,
हर रिश्ता पास बुलाना छोड़ दीजिए।
जो साथ रहे, उसे प्यार दीजिए,
जो जाना चाहे, उसे जाने दीजिए।
ज़िंदगी बहुत छोटी है दोस्तों,
हर बात का बोझ उठाना छोड़ दीजिए। ✨
© Sukanya Yogesh (2026)
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