ख़ुद को बचाना सीखिए
कोई नाराज़ है आपसे,
तो नाराज़ रहने दीजिए,
हर रूठे हुए इंसान को
मनाना छोड़ दीजिए।
कोई बुरा कहे आपको,
तो दिल पर लेना छोड़ दीजिए,
हर किसी की बात से अपनी
कीमत आँकना छोड़ दीजिए।
कोई चोट पहुँचाना चाहे,
तो ख़ुद को बचाना सीखिए,
हर तीर को दिल तक आने से
पहले रोकना सीखिए।
इतने मज़बूत बन जाइए
कि दर्द भी बेअसर हो जाए,
कोई जितना चाहे तोड़े आपको,
मन फिर भी न बिखर पाए।
रिश्ता बचाने की कोशिश हो,
तो दोनों तरफ़ से होनी चाहिए,
एक ही इंसान झुकता रहे,
तो दूरी भी ज़रूरी होनी चाहिए।
जो समझना ही नहीं चाहता,
उसे समझाना छोड़ दीजिए,
जो बार बार दिल दुखाए,
उसके पीछे जाना छोड़ दीजिए।
न बदला रखिए, न बैर रखिए,
बस थोड़ी दूरी रख लीजिए,
जिसे बदलना आपके बस में नहीं,
उसे वहीं छोड़ दीजिए।
हर लड़ाई लड़ना ज़रूरी नहीं,
हर बात का जवाब भी नहीं,
कभी ख़ामोशी हार नहीं होती,
और दूर जाना गुनाह भी नहीं।
अपनी शांति की रक्षा कीजिए,
अपना स्वाभिमान सँभालिए,
कहे सुकन्या, जो क़दर न जाने,
उसे मुस्कुराकर जाने दीजिए।
© Sukanya Yogesh (2026)
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