चलो सैनिकों, आगे बढ़ो 🇮🇳
चलो सैनिकों, आगे बढ़ो,
कदम कदम बढ़ाओ।
भारत माँ की रक्षा में,
अपना शीश चढ़ाओ।
आगे कदम बढ़ाया है,
तो पीछे नहीं हटाएँगे।
अगर गोली चली तो हम,
अपना सीना दिखलाएँगे।
दुश्मन चाहे लाख रोक ले,
हम रुकने न पाएँगे।
भारत माँ की आज़ादी का,
झंडा हम फहराएँगे।
नहीं डरेंगे गोली से हम,
नहीं किसी से हारेंगे।
अपनी धरती, अपनी माता,
उस पर जान भी वारेंगे।
चलो सैनिकों, आगे बढ़ो,
मिलकर कदम बढ़ाओ।
भारत माँ के वीर सपूतों,
अपना फ़र्ज़ निभाओ।
आँधी आए, तूफ़ाँ आए,
कदम नहीं रुक पाएँगे।
आगे कदम बढ़ाया है,
तो पीछे नहीं हटाएँगे।
दुश्मन को हम बता देंगे,
भारतवासी क्या होते हैं।
देश की खातिर जीते हैं,
देश की खातिर मरते हैं।
चलो सैनिकों, आगे बढ़ो,
विजय का गीत सुनाओ।
भारत माँ की जय बोलो,
तिरंगा ऊँचा लहराओ। 🇮🇳
✨ इस कविता के पीछे की कहानी
यह कविता मैंने कक्षा 7 में, लगभग 12 वर्ष की उम्र में लिखी थी। हमारी हिंदी शिक्षिका Mrs. Kirti Gupta ने हमें हरिवंश राय बच्चन जी की पंक्तियों “चल मर्दाने, सीना ताने…” से प्रेरणा लेकर भारत की स्वतंत्रता और देशभक्ति पर अपनी कविता लिखने की चुनौती दी थी।
उसी चुनौती से जन्मी थी “चलो सैनिकों, आगे बढ़ो।” ❤️
दुर्भाग्य से मेरी वह पुरानी डायरी बाद में गलती से फेंक दी गई, जिसमें मेरी कई बचपन की कविताएँ थीं। इस कविता की कुछ पंक्तियाँ आज भी मुझे याद हैं और कुछ हिस्सों को मैंने उन्हीं यादों और मूल भावना के आधार पर फिर से जोड़ा है।
आज इतने वर्षों बाद इसे पढ़ते हुए मुझे इसकी सरलता ही सबसे प्यारी लगती है। शब्द एक 12 साल की बच्ची के थे, लेकिन भावना सच्ची थी। ❤️
जय हिंद! 🇮🇳
वंदे मातरम्! 🇮🇳
#ChildhoodMemories #MyPoetry #HindiPoetry #DeshBhakti #PatrioticPoetry #India #JaiHind #SukanyasMusings

No comments:
Post a Comment